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Memory Lane
Recalling the memories


द आर्टिस्ट्स कर्स (The Artist's Curse)
मैं बचपन से ही ड्राइंग में माहिर हूँ। मुझे मेरे पुराने स्कूल में ड्राइंग की चैंपियन बोला जाता था। मुझे भी ड्राइंग से काफी लगाव था। लेकिन एक दिन मुझे ड्राइंग से इतनी नफरत हो गई कि मैंने ड्राइंग करना ही छोड़ दिया। "द आर्टिस्ट्स कर्स" (The Artist's Curse) माना जाता है कि अगर कोई कलाकार अपने सबसे पसंदीदा इंसान की तस्वीर बनाता है, तो वह इंसान उसकी जिंदगी से हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो जाता है। हाँ, आपको यह सिर्फ एक अंधविश्वास या कहानी लग रही होगी; मुझे भी पहले यह ऐसा ही लगता था। ले

Manika Negi
Jul 162 min read
मेरी प्यारी दोस्त
यह बात तब की है, जब मैं चौथी कक्षा में पढ़ती थी। उस वक्त मेरी उम्र यही कोई 9 साल रही होगी। बचपन के उस दौर में स्कूल में मेरी एक सहेली थी—कुमकुम। वह सिर्फ मेरी दोस्त नहीं थी, बल्कि मेरी बहन जैसी थी। पढ़ाई-लिखाई में वह मुझसे काफी अच्छी थी और हमेशा मेरी मदद के लिए तैयार रहती थी। उसका वो मुस्कुराता हुआ चेहरा मुझे आज भी याद आता है। वक्त बीता और हम दोनों साथ में पांचवीं कक्षा में आ गए। हमारी दोस्ती और गहरी हो चुकी थी। एक दिन क्लास में हमारा सामाजिक विज्ञान का टेस्ट था। परीक्षा के

Yogita
Jun 262 min read


हे वटवृक्ष!
उस दिन वट सावित्री की पूजा का दिन था। आवश्यकतावश घर में यह प्रश्न उठा कि क्या आसपास में कोई बरगद का पेड़ है। यह तो आपको पता ही होगा कि यह व्रत हिन्दू विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की सुखद लंबी आयु के लिए करती हैं। इस व्रत में वे बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते हुए कलावा/धागा उसके तने पर लपेटती हैं। तो, हम जहाँ रह रहे थे, मुझे उस समय उसके आस-पास में बरगद के पेड़ की कोई जानकारी नहीं थी। पर एक दिन साथ में घर लौटते वक़्त श्रीमतीजी को रास्ते में एक जगह बरगद का पेड़ दिखा था। उन्होंने तभी

Avinash Jha
Jun 233 min read


Untold Maggi Mania
Maggi has been crafted for every household name. One of the longest journeys by Nestle to change the foodie behaviour of Indian Masses as Instant Noddles in 2 minute strategy. Healthy or unhealthy, restrictions to pregnant lady and to infant due to MSG, it is not an issue. But acceptance by the masses especially the younger generation of every decade is a special untold story. Two minute strategy was a marketing gimmicks. Adding vegetables or egg or anything else as per the

Ranjeet Jaiswal
Jun 183 min read


शाकाहारी माँस
क्या आपने शाकाहारी माँस खाया है? नहीं-नहीं, शाकाहारी का माँस नहीं, शाकाहारी माँस! नहीं समझे? यदि समझ गए तो बहुत बढ़िया, और न समझे तो आगे समझ आ ही जाएगा! चिंता की कोई बात ही नहीं! क्यों, इतनी-सी बात यदि ज़िंदगी के हर मामले में आ जाए, तो कैसी सहजता हो, कैसा आराम हो! कुछ पहले से आता हो तो बहुत बढ़िया, न आता हो तो जानने-सीखने का अवसर बना है, जान लेंगे, सीख लेंगे। आपको बताता हूँ कि क्या है यह शाकाहारी माँस और कैसे आया यह मेरी ज़िंदगी में! पर उसे बताने से पहले आपसे वह एक बात साझा क

Avinash Jha
Jun 185 min read
पी-पी वाला बाजा
यह कहानी मेरी और मेरी छोटी बहन की है, जब हम दोनों बहुत छोटे थे। उस वक्त मेरी उम्र करीब 6 साल थी और मेरी बहन सिर्फ 2 साल की थी। मेरी बहन को बचपन से ही अंधेरे से बहुत ज़्यादा डर लगता था, लेकिन बचपन की नादानी में हम इस डर की गहराई को नहीं समझते थे। एक दिन दोपहर के समय हम दोनों घर में छुपन-छुपाई खेल रहे थे। सबसे पहले छुपने की बारी मेरी थी। हमारे घर में लकड़ी की छोटी-छोटी कई अलमारियां थीं, मैं फुर्ती से उनमें से एक के अंदर छुप गई। मेरी बहन ने अपनी नन्हीं आँखों से मुझे थोड़ी ही देर

Yogita
Jun 173 min read
बातें
मैं बातें खूब करता हूँ और बहुत अच्छी करता हूँ। शिक्षक हो जाने में मेरे इस गुण की सार्थकता दिखती है। चलिए मेरी अनेक बातों में से आपको एक बात बताता हूँ। मुझे अपने नए स्कूल में आए हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे। उन कुछ दिनों में मेरे प्राचार्य महोदय को यह पता चल गया था कि यह बोलता अच्छा है और मंच पर जाने में इसे हिचक भी नहीं। उन्होंने इसी भरोसे पर एक दिन मेरे सुबह स्कूल पहुँचते ही एक ज़िम्मेदारी सौंपी। विभाग की ओर से एक आदेश आया था कि हाथ की सफाई के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक क

Avinash Jha
Jun 133 min read
मिठाई वाला भूत
यह घटना तब की है जब मैं 5 साल की थी। उस समय मैं और मेरे दादा-दादी एक साथ दूसरे घर में सोने जाते थे। जिस रास्ते से हम जाते थे उस रास्ते में एक पेड़ पड़ता था। लोगों का कहना था कि उस पेड़ पर एक चुड़ैल रहती थी। जो भी वहाँ से कुछ भी मीठा लेकर जाता था वह उसके पीछे पड़ जाती थी। यह बात 28 नवंबर की रात की है। उस रात हमारे घर में कुछ कार्यक्रम हुआ था जिसकी वजह से हमें उस दूसरे घर जाने में देर हो गई। इसलिए हम अपना खाने का सामान पैक करके उस घर की ओर चल पड़े। हमारे पास रसगुल्ले भी थे। उस

Yogita
Jun 132 min read


एक फ्रेम, एक परिवार
नौवीं के बच्चों ने ठान लिया था कि अपने सामाजिक विज्ञान के अध्यापक, A... सर को विदाई पर कुछ खास देंगे। सर अगले महीने ट्रांसफर हो रहे हैं। पूरी क्लास ने प्लान बनाया – सर की 3 साल 8 महीने की पुरानी फोटो इकट्ठी करके एक बड़ा फोटो फ्रेम बनवाया जाए। S..... और M.... ने जिम्मेदारी ली। उन्होंने सर के पुराने छात्रों से और खुद A.... सर से फोटो मांगी और फोटो जुटाईं। 15 दिन की मेहनत से बहुत सुंदर फ्रेम बन गया। फ्रेम के बीच में लिखा था – "आप हमारे रास्ते के दीपक हैं, अ.... सर।" पर AB....
Amit Dhaka
Jun 133 min read
हम और वे...
आज मेघा बहुत खुश थी क्योंकि आज उसके स्कूल में वार्षिकोत्सव था। वह खूब चहक रही थी क्योंकि आज वह मंच पर डांस करने वाली थी। कई दिन से वह अभ्यास कर रही थी अपने फ्रैंड्स के साथ। स्कूल में, घर में, जब भी मौका मिलता वह डांस की प्रैक्टिस किया करती। आज वह अवसर था कि अपनी कला को वह मंच पर प्रस्तुत करे। आज उसकी नींद भी बड़ी जल्दी टूटी थी या यूँ कहिए कि शायद वह पिछली रात ठीक से सोई ही नहीं! कैसे रात बीती पता ही न चला! सुबह 4:00 बजे अचानक से उसका ध्यान गया- ‘मैंने सारी चीजें रख ली हैं न?

Avinash Jha
Jun 138 min read
ठक-ठक
शायद वह रविवार का दिन था। मैं भैया के साथ उनके दोस्तों से मिलने गया। जगह का नाम तो याद नहीं आ रहा। पर वह जगह थी दिल्ली में ही! जब हम उनके कमरे के दरवाजे पर पहुँचे तो देखा वे कुछ दोस्त ज़मीन पर बैठे हुए अपने सामने रखी टीवी पर नज़रें गड़ाए हुए थे। चूँकि यह नब्बे के दशक की बात है तो उस समय के लोग जानते होंगे कि टीवी कैसा हुआ करता था…वही बक्से वाला! उस तरह के टीवी को CRT टीवी के नाम से आजकल के लोग गूगल पर सर्च करके जान सकते हैं। तो आखिर उस टीवी पर ऐसा क्या चल रहा था कि नज़रें उस प

Avinash Jha
Jun 95 min read


मेरा मासूम भाई
बचपन में मेरे भाई के साथ एक बड़ी मजेदार घटना घटी थी। मेरा भाई तब 3 साल का ही था। मेरे पापा और मामा कार्तिक को चलना सीखा रहे थे, पर वह चल ही नहीं रहा था। मैं अंदर कमरे में पढ़ रही थी। मुझे भी उसे देखना था चलते हुए। मैं कमरे से झाँकने लगी। काफी कोशिश करने के बाद पापा और मामा थक गए। उनकी हालत तो बिल्कुल टाइट हो चुकी थी! उन्हें देखकर मुझे तो इतनी हँसी आ रही थी, इतनी हँसी आ रही थी कि मत ही पूछो! फिर अचानक कार्तिक खड़ा हुआ और चलने लगा। सब तालियाँ बजा रहे थे। मैं आश्चर्य में थी और स
Himani
Jun 82 min read


रिस्की प्यार
क्या आपको कभी किसी पर प्यार आया है? यदि हाँ, तो आप मुझे बेहतर समझ सकेंगे। एक दिन की जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ वह ऐसे ही एक प्यार की छोटी-सी कहानी है। यह बात तब की है जब मैं ओडिशा के सुंदरगढ़ के जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ता था जो कि आवासीय यानी हॉस्टल वाला था। उस समय शायद मैं नौवीं या दसवीं कक्षा में था। शाम का वक़्त था। आसमान में सूरज लालिमा लिए ढल रहा था। मैं टहलने निकला… अकेले। हमारे हॉस्टल की बाउंड्री एक जगह टूटी हुई थी। मैं उस पार एक तालाब की ओर बढ़ रहा था। रास्ता कच

Avinash Jha
Jun 71 min read


मदद
पिछले वर्ष गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ एक मेले में गई थी। शाम का समय था। चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनियाँ जगमगा रही थीं। बच्चे झूलों का आनंद ले रहे थे और दुकानों से खाने-पीने की चीज़ों की खुशबू आ रही थी। मेले का वातावरण बहुत उत्साहपूर्ण और आनंदमय था। मैं भी अपने माता-पिता के साथ मेले का आनंद ले रही थी। तभी मेरी नज़र एक छोटी बच्ची पर पड़ी। वह एक कोने में खड़ी रो रही थी। उसके चेहरे पर डर और घबराहट साफ दिखाई दे रहा था। उसे देखकर मेरे मन में दया और चिंता का भाव उत्प

Reeta Kumari
Jun 61 min read


मछली के रिश्तेदार
मैं शायद उस समय चौथी कक्षा में पढ़ता रहा होऊंगा। जहाँ हम रहा करते थे, वहाँ से अपने गाँव जाना हुआ। मुझे याद आता है कि हमारा बाँस पर मिट्टी की लेप वाली दीवार वाला घर हुआ करता था। आँगन भी गोबर और मिट्टी से लिपा हुआ था। उस दिन घर में कुछ विशेष बन रहा था। माँ ने आँगन में एक मिट्टी के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाई हुई थी। उसमें मछलियाँ तली जा रही थीं। मछलियों के टुकड़ों को तले जाते देख अनायास ही मन में एक खयाल आया और मैंने माँ से पूछ डाला, “माँ, इन मछलियों के भी तो माता-पिता, भाई-बहन होते हों

Avinash Jha
Jun 53 min read
कुरकुरे का मजा
मैं तब छह साल की थी, जब मैं अपने गाँव उत्तराखंड घूमने गई थी। हम रात के समय गाँव पहुँचे। हम जैसे-जैसे घर के थोड़े-थोड़े पास जा रहे थे, वैसे-वैसे हमें घर के बाहर कोई खड़ा हुआ थोड़ा स्पष्ट दिखने लगा था। जब हम घर पहुँचे, तब पता चला कि वह कोई और नहीं, वह तो मेरी ताई जी थीं। फिर उन्होंने हमें तिलक लगाया और मम्मी को गले लगाया। फिर हम कमरे में कंबल ओढ़कर बैठ गए और हमने खूब बातें की। अगले दिन मुझे मेरे भैया मिले। वे हमारे लिए कुरकुरे लाए थे। हमें कुरकुरे देते ही भैया बिस्तर पर लेट गए।
Himani
Jun 52 min read


ज्ञानी जी
मैं हमेशा से समझदार रहा हूँ। देखिए, आप मेरे समझदार होने के एहसास के इस सरल अभिव्यक्ति पर हँसिए मत! मैं अपनी समझदारी का पूरा प्रमाण रखूंगा। अब यही बात लीजिए। मेरे बचपन में, परिवार और स्कूल में मुझे अनुकरण किए जाने की बात अन्य बच्चों को कही जाती थी। आखिर मैं समझदार था, तभी तो! आगे चलकर मैं शिक्षक बना। क्या यह अपने आप में समझदार होने का प्रमाण नहीं!... है न? यदि आपको अभी भी मेरे समझदार होने पर शक़ है तो आगे की एक और बात बताता हूँ। वर्ष 2016 में, दिल्ली के सरकारी शिक्षा व्यवस्था क

Avinash Jha
Jun 57 min read
ग्रैजुएट
एक दिन घर में मेरी श्रीमती जी पूजा की तैयारी में लगी हुई थीं। उन्होंने बेडरूम के फर्श को धोकर साफ किया। मेरे लिए आदेश आया- “गैस सिलेंडर इस कमरे में लाकर पूजा वाले चूल्हे में जोड़ दीजिए।” मैंने आदेश का पालन किया। कोई जिरह नहीं किया। आस्था का सवाल था। विशेष साफ सफाई और पवित्रता का ध्यान रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही थी। मैं रसोई घर में गया। वहाँ के चूल्हे से गैस सिलिंडर का पाइप अलग किया और बेडरूम के फर्श पर रखे पूजा वाले चूल्हे से उसे जोड़ दिया। श्रीमती जी ने कड़ाही चढ़ाई और पूज

Avinash Jha
Jun 12 min read


एक और कालिदास...
यह घटना तब की है जब हम उड़ीशा के कांसबहाल में रहा करते थे। पिताजी की वहाँ नौकरी थी और वहाँ हमें कंपनी का मकान मिला हुआ था। बहुत ही सुंदर कॉलोनी थी। मकान के साथ बागवानी के लिए जगह…साथ में एक बड़ा आंगन। वहाँ हरियाली भी खूब थी। रोड के दोनों ओर बड़े–बड़े छायादार पेड़ थे। उन दिनों हमारे घर में केरोसिन और लकड़ी का इस्तेमाल खाना पकाने के इंधन के रूप में होता था। वहाँ पास के गाँव के लोग जलावन की लकड़ी बेचने के लिए गट्ठर बाँधकर आया करते थे। आज भी यह बताते समय वह दृश्य जीवंत महसूस हो रहा है।

Avinash Jha
Jun 13 min read
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