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Poems
Being poetic about Life
कुछ तो कहो
कुछ तो कहो; हाँ, सलीके से कहो; कि कहोगे तो बात चलेगी। चलेगी, तभी तो बात बनेगी! यूँ चुप न रहो; क्योंकि चुप्पी… कब घुटन बन जाती है पता ही नहीं चलता। असहज हो, तो कहो। दर्द में हो, तो कहो। कहोगे नहीं… तो भला बात कैसे बनेगी!

Avinash Jha
Jul 191 min read
फिर ऐसा क्यों?
एक नन्ही–सी बालिका के नयनों में थे अश्रु भरे। और साथ में थे उसके न जाने कई प्रश्न खड़े। करीब पहुँचकर मैंने पूछी उससे उसकी व्यथा। नयन मेरे भी भर आए सुन उसकी करुण कथा। पूछा उसने - हे गुरुवर यह अल्ट्रासाउंड क्या होता है? मैंने भींच उसे अंकों में कहा - प्रश्न पूछने को कोई रोता है! पर कॉंपते होठों ने उसके प्रश्न वही दोहराया। आशंकित हो सिहर उठा मैं, और धीरे से बतलाया - 'यह है चमत्कार विज्ञान का, छुपी बात बताता है। क्या है शरीर के भीतर, बाहर ही यह दिखलाता है।' 'पर यह कैसा चमत्कार ह

Avinash Jha
Jun 122 min read
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