top of page

मिठाई वाला भूत

यह घटना तब की है जब मैं 5 साल की थी। उस समय मैं और मेरे दादा-दादी एक साथ दूसरे घर में सोने जाते थे। जिस रास्ते से हम जाते थे उस रास्ते में एक पेड़ पड़ता था। लोगों का कहना था कि उस पेड़ पर एक चुड़ैल रहती थी। जो भी वहाँ से कुछ भी मीठा लेकर जाता था वह उसके पीछे पड़ जाती थी।


यह बात 28 नवंबर की रात की है। उस रात हमारे घर में कुछ कार्यक्रम हुआ था जिसकी वजह से हमें उस दूसरे घर जाने में देर हो गई। इसलिए हम अपना खाने का सामान पैक करके उस घर की ओर चल पड़े। हमारे पास रसगुल्ले भी थे। उसका पैकेट मैंने पकड़ा हुआ था। समय करीब 11:30 का हो गया था। हमें उस घर पहुँचने में लगभग 15 से 20 मिनट लगते थे। तो हम रात के 12:00 बजे से थोड़ा ही पहले पहुँच पाए। हमने थोड़ा रेस्ट करके खाना और रसगुल्ला खा लिया। न जाने क्या हुआ, उस रात मुझे कुछ बेचैनी होने लगी और पूरी रात मुझे नींद नहीं आई।


अगले दिन मैंने यह सब घटना, रात को नींद न आना, अजीब-अजीब सी आवाज सुनाई देना, आदि अपनी दादी को बताया। उसी दिन यानी 29 नवंबर को मेरी तबीयत खराब हो गई। यह सब देखकर मेरी अम्मा को लगा कि जो हम रसगुल्ला लेकर गए थे उसकी वजह से यह सब हुआ है। उस पेड़ के नीचे से हम गए थे तो वह चुड़ैल जो है, हमारे पीछे चली आई है। यह सोचकर मेरी अम्मा डर गईं और उन्होंने हमें एक मंदिर में भेजा जहाँ पर मेरा झाड़ा लगाया गया। ऐसा ही कुछ दो से तीन महीने चला। कोई सुधार नहीं आया, बल्कि मेरी तबीयत और खराब होने लगी। एक दिन मेरी मौसी ने एक डॉक्टर के पास ले जाकर दिखाया। उसने देखकर बताया कि मुझे 2 महीने से टाइफाइड था। तब हमें असलियत पता चली कि वह तो पेड़ वाला भूत नहीं, टाइफाइड वाला भूत था...और वह झाड़-फूँक से नहीं, दवाई से भागने वाला था।

Recent Posts

See All
गधा

अपने 11 वर्ष की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते न जाने कई बार उसने लोगों के मुँह से अपने लिए ‘गधा’ संबोधन सुना होगा। ‘ओए गधे! सुनता नहीं है।’ ‘गधे! तुमसे नहीं होगा।’ ‘गधा कहीं का! तुझे इतनी सी बात समझ नहीं

 
 
 
नौवीं फेल

नौवीं कक्षा का मासूम बबलू एक नम्र निवेदन लेकर प्रिंसिपल ऑफिस में पहुँचा। बबलू ने कहा, “सर, मुझे स्कूल से मत निकालिए। मुझे NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) में मत डालिए। मैं तीसरी बार फेल नहीं

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page