रिस्की प्यार
- Avinash Jha

- Jun 7
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Updated: Jun 7
क्या आपको कभी किसी पर प्यार आया है? यदि हाँ, तो आप मुझे बेहतर समझ सकेंगे।
एक दिन की जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ वह ऐसे ही एक प्यार की छोटी-सी कहानी है। यह बात तब की है जब मैं ओडिशा के सुंदरगढ़ के जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ता था जो कि आवासीय यानी हॉस्टल वाला था। उस समय शायद मैं नौवीं या दसवीं कक्षा में था। शाम का वक़्त था। आसमान में सूरज लालिमा लिए ढल रहा था। मैं टहलने निकला… अकेले। हमारे हॉस्टल की बाउंड्री एक जगह टूटी हुई थी। मैं उस पार एक तालाब की ओर बढ़ रहा था। रास्ता कच्चा था, पर चौड़ा था। उसके आसपास खूब हरियाली थी। गाय का एक झुंड वहाँ से हरे-हरे घास चरते हुए गुजर रहा था। उस झुंड में पीछे चल रहे एक प्यारे से बछड़े पर मुझे प्यार आ गया…

जब प्यार आया तो इज़हार करने का भी मन हुआ। मैं आगे बढ़ा और उसकी पीठ पर हाथ फेरा। न जाने उसे क्या हुआ! उसने एक दुलत्ती मेरे दाएं घुटने पर मारी और भाग गया। मैं भौंचक्का रह गया। अब बारी अपने घुटने पर हाथ फेरने की थी… मतलब सहलाने की थी। थोड़ी देर बाद अपने उस प्यार की याद लिए मैं लंगड़ाता हुआ अपने हॉस्टल की ओर लौट चला। एक ज्ञान की प्राप्ति हुई कि आपके प्यार को प्यार ही समझा जाए ऐसा ज़रूरी नहीं। प्यार जताने में भी रिस्क है! पता नहीं कौन कब दुलत्ती मार जाए!




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