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अंतर्यात्रा
बातें
मैं बातें खूब करता हूँ और बहुत अच्छी करता हूँ। शिक्षक हो जाने में मेरे इस गुण की सार्थकता दिखती है। चलिए मेरी अनेक बातों में से आपको एक बात बताता हूँ। मुझे अपने नए स्कूल में आए हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे। उन कुछ दिनों में मेरे प्राचार्य महोदय को यह पता चल गया था कि यह बोलता अच्छा है और मंच पर जाने में इसे हिचक भी नहीं। उन्होंने इसी भरोसे पर एक दिन मेरे सुबह स्कूल पहुँचते ही एक ज़िम्मेदारी सौंपी। विभाग की ओर से एक आदेश आया था कि हाथ की सफाई के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक क

Avinash Jha
4 days ago3 min read
ठक-ठक
शायद वह रविवार का दिन था। मैं भैया के साथ उनके दोस्तों से मिलने गया। जगह का नाम तो याद नहीं आ रहा। पर वह जगह थी दिल्ली में ही! जब हम उनके कमरे के दरवाजे पर पहुँचे तो देखा वे कुछ दोस्त ज़मीन पर बैठे हुए अपने सामने रखी टीवी पर नज़रें गड़ाए हुए थे। चूँकि यह नब्बे के दशक की बात है तो उस समय के लोग जानते होंगे कि टीवी कैसा हुआ करता था…वही बक्से वाला! उस तरह के टीवी को CRT टीवी के नाम से आजकल के लोग गूगल पर सर्च करके जान सकते हैं। तो आखिर उस टीवी पर ऐसा क्या चल रहा था कि नज़रें उस प

Avinash Jha
Jun 95 min read
सदा सुखी रहो!
“सदा सुखी रहो!” यह आशीर्वचन हमने खूब पाया भी और दिया भी। पर क्या अपनी और दूसरों की ज़िंदगी में सुख सुनिश्चित हुआ? संबंधों में घुटन और परिवारों में टूटन के मामले भरे पड़े हैं। सभी की शुभभावनाओं और शुभकामनाओं के बावज़ूद ऐसी स्थिति क्यों है? क्या परिवार में पैसे और संसाधनों की कमी इसका कारण है? यदि ऐसा है तो साधन संपन्न अमीर परिवारों में ऐसी स्थिति क्यों आती है? यहाँ तक कि वो परिवार जो कभी विपन्नता में मुस्कुराकर जी चुके हों, उनमें से अनेक सम्पन्नता आने के बाद बिखराव में क्यों चल

Avinash Jha
Jun 85 min read
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