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Stories
Exploring life through stories
गधा
अपने 11 वर्ष की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते न जाने कई बार उसने लोगों के मुँह से अपने लिए ‘गधा’ संबोधन सुना होगा। ‘ओए गधे! सुनता नहीं है।’ ‘गधे! तुमसे नहीं होगा।’ ‘गधा कहीं का! तुझे इतनी सी बात समझ नहीं आती!’ एक दिन अचानक उसे क्या सूझी; उसने अपनी एक कॉपी में कुछ कॉलम बनाए और उसमें लिखना शुरू किया कि किसने कब-कब उसे गधा कहकर पुकारा। लिखते हुए सप्ताह भर बीता होगा। जब उसने अपने शिक्षक के मुँह से यह संबोधन सुना तो उसने पाया कि यह इस सप्ताह में 17वीं बार था। उसे अपने अंदर कुछ ‘ढेंचू

Avinash Jha
Jul 212 min read
नौवीं फेल
नौवीं कक्षा का मासूम बबलू एक नम्र निवेदन लेकर प्रिंसिपल ऑफिस में पहुँचा। बबलू ने कहा, “सर, मुझे स्कूल से मत निकालिए। मुझे NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) में मत डालिए। मैं तीसरी बार फेल नहीं होऊंगा।” प्रिंसिपल सर ने कहा, “देखो बबलू, हम तुम्हें निकाल कहाँँ रहे हैं! तुम्हें नियमित विद्यालय के विषयों में पास होने में दिक्कत आ रही है। तुम्हें वह कठिन लगता है। यहाँ तो मज़बूरी है, तुम्हारा विषय बदल नहीं सकते। पर वहाँ आसान लगने वाले अन्य विषय लेकर तुम पढ़ सकते हो और तुम्हा

Avinash Jha
Jul 181 min read


द आर्टिस्ट्स कर्स (The Artist's Curse)
मैं बचपन से ही ड्राइंग में माहिर हूँ। मुझे मेरे पुराने स्कूल में ड्राइंग की चैंपियन बोला जाता था। मुझे भी ड्राइंग से काफी लगाव था। लेकिन एक दिन मुझे ड्राइंग से इतनी नफरत हो गई कि मैंने ड्राइंग करना ही छोड़ दिया। "द आर्टिस्ट्स कर्स" (The Artist's Curse) माना जाता है कि अगर कोई कलाकार अपने सबसे पसंदीदा इंसान की तस्वीर बनाता है, तो वह इंसान उसकी जिंदगी से हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो जाता है। हाँ, आपको यह सिर्फ एक अंधविश्वास या कहानी लग रही होगी; मुझे भी पहले यह ऐसा ही लगता था। ले

Manika Negi
Jul 162 min read


साइकिल वाला सपना
राहुल दिल्ली के एक छोटे से मोहल्ले में रहता था। उसके पिता ठेला लगाकर सब्ज़ी बेचते थे। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह एक फोन भी खरीद सके या ढंग के कपड़े पहन सके। स्कूल में लगभग सभी बच्चों के पास साइकिल थी, लेकिन राहुल के पास नहीं थी। वह रोज़ दो किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाता था और लौटते समय किसी दोस्त की साइकिल का कैरियर पकड़ लेता था। एक दिन शिक्षक ने कक्षा में सभी से पूछा, "बड़े होकर तुम क्या बनोगे?" किसी ने डॉक्टर तो किसी ने इंजीनियर कहा। जब राहुल की बारी आई, तो वह ख

Manika Negi
Jun 302 min read
मेरी प्यारी दोस्त
यह बात तब की है, जब मैं चौथी कक्षा में पढ़ती थी। उस वक्त मेरी उम्र यही कोई 9 साल रही होगी। बचपन के उस दौर में स्कूल में मेरी एक सहेली थी—कुमकुम। वह सिर्फ मेरी दोस्त नहीं थी, बल्कि मेरी बहन जैसी थी। पढ़ाई-लिखाई में वह मुझसे काफी अच्छी थी और हमेशा मेरी मदद के लिए तैयार रहती थी। उसका वो मुस्कुराता हुआ चेहरा मुझे आज भी याद आता है। वक्त बीता और हम दोनों साथ में पांचवीं कक्षा में आ गए। हमारी दोस्ती और गहरी हो चुकी थी। एक दिन क्लास में हमारा सामाजिक विज्ञान का टेस्ट था। परीक्षा के

Yogita
Jun 262 min read
झूठ का सहारा
माधव नाम का एक लड़का था। वह एक बड़े शहर में रहता था। माधव बहुत शरारती था 😄। उसके पापा का अपना काम(व्यवसाय) था और मम्मी घर की तथा माधव की देखभाल करती थीं। माधव दिनभर खेलता रहता था ⚽। उसके मम्मी-पापा उसकी इस आदत से बहुत चिंतित रहते थे। कुछ दिनों बाद माधव की परीक्षा थी, पर वह पढ़ने का नाम ही नहीं ले रहा था 📚❌। जब भी मम्मी उससे कहतीं, "बेटा पढ़ लो, थोड़े अच्छे नंबर आ जाएँगे," तब माधव कहता-“अरे मम्मी, आप चिंता मत करो, मैं पास हो जाऊँगा 😎।” और यह कहकर वह वापस टीवी देखने लग जाता
Himani
Jun 242 min read
लाड़-प्यार की कीमत
यह कहानी हमारे ही मोहल्ले की है, जहाँ एक परिवार रहता है। लॉकडाउन से पहले वे लोग बहुत खुश थे और हँसी-खुशी अपनी ज़िंदगी जी रहे थे। उनके घर में एक छह साल का छोटा बच्चा था, जो पूरे घर की जान था। जब लॉकडाउन लगा, तो सब कुछ बंद हो गया। उस समय वह बच्चा घर में बैठे-बैठे बहुत ज़्यादा मैदे से बनी चाऊमीन और मोमोज़ खाने लगा। हर रोज़ उसकी यही ज़िद रहती थी और घर वाले भी लाड़-प्यार में उसे खिला देते थे। लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह बाहर का खाना अंदर ही अंदर उसे कितना नुकसान पहुँचा रह

Yogita
Jun 242 min read
मेहनत का फल
मधु नाम की एक लड़की थी। वह अपने दादाजी के साथ एक गाँव में एक छोटी-सी झोपड़ी में रहती थी। मधु को पढ़ाई का बहुत शौक था। वह अक्सर अपने घर के सामने वाले पेड़ के नीचे अपने दादाजी के साथ बैठकर पढ़ती और बातें करती थी। उसके दादाजी हमेशा उससे कहते थे कि जिसके साथ कोई नहीं होता उसके साथ एजुकेशन होती है, और यह सुनकर मधु और मेहनत करती थी। मधु बस चाहती थी कि मेरे दादाजी ने जिन कष्टों के साथ अब तक की ज़िंदगी बिताई है वह उन्हें उससे बेहतर ज़िंदगी दे पाए। घर में वही तो उसके एकमात्र सहारा थे।
Himani
Jun 192 min read
बहु चाहिए या बाई?
हमारे मोती नगर में दो परिवार रहते हैं—एक शर्मा जी का और दूसरा वर्मा जी का। इत्तफाक देखो कि आने वाले कुछ महीनों में दोनों ही घरों में शादियाँ थीं क्योंकि दोनों के बेटों का रिश्ता पक्का हो चुका था। लेकिन भाई, दोनों परिवारों की सोच में जमीन-आसमान का अंतर था। शर्मा जी का बेटा है अमन, जो कि एक बिजनेसमैन है। शर्मा जी के घर वालों की पुरानी सोच थी कि बहू ऐसी आए जो चौका-बर्तन और घर का सारा काम संभाल ले, ताकि सास-ससुर को आराम मिले। अमन की तो अरेंज्ड मैरिज थी, तो जैसा घर वालों ने कहा, उ

Yogita
Jun 183 min read
पी-पी वाला बाजा
यह कहानी मेरी और मेरी छोटी बहन की है, जब हम दोनों बहुत छोटे थे। उस वक्त मेरी उम्र करीब 6 साल थी और मेरी बहन सिर्फ 2 साल की थी। मेरी बहन को बचपन से ही अंधेरे से बहुत ज़्यादा डर लगता था, लेकिन बचपन की नादानी में हम इस डर की गहराई को नहीं समझते थे। एक दिन दोपहर के समय हम दोनों घर में छुपन-छुपाई खेल रहे थे। सबसे पहले छुपने की बारी मेरी थी। हमारे घर में लकड़ी की छोटी-छोटी कई अलमारियां थीं, मैं फुर्ती से उनमें से एक के अंदर छुप गई। मेरी बहन ने अपनी नन्हीं आँखों से मुझे थोड़ी ही देर

Yogita
Jun 173 min read
बातें
मैं बातें खूब करता हूँ और बहुत अच्छी करता हूँ। शिक्षक हो जाने में मेरे इस गुण की सार्थकता दिखती है। चलिए मेरी अनेक बातों में से आपको एक बात बताता हूँ। मुझे अपने नए स्कूल में आए हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे। उन कुछ दिनों में मेरे प्राचार्य महोदय को यह पता चल गया था कि यह बोलता अच्छा है और मंच पर जाने में इसे हिचक भी नहीं। उन्होंने इसी भरोसे पर एक दिन मेरे सुबह स्कूल पहुँचते ही एक ज़िम्मेदारी सौंपी। विभाग की ओर से एक आदेश आया था कि हाथ की सफाई के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक क

Avinash Jha
Jun 133 min read
मिठाई वाला भूत
यह घटना तब की है जब मैं 5 साल की थी। उस समय मैं और मेरे दादा-दादी एक साथ दूसरे घर में सोने जाते थे। जिस रास्ते से हम जाते थे उस रास्ते में एक पेड़ पड़ता था। लोगों का कहना था कि उस पेड़ पर एक चुड़ैल रहती थी। जो भी वहाँ से कुछ भी मीठा लेकर जाता था वह उसके पीछे पड़ जाती थी। यह बात 28 नवंबर की रात की है। उस रात हमारे घर में कुछ कार्यक्रम हुआ था जिसकी वजह से हमें उस दूसरे घर जाने में देर हो गई। इसलिए हम अपना खाने का सामान पैक करके उस घर की ओर चल पड़े। हमारे पास रसगुल्ले भी थे। उस

Yogita
Jun 132 min read


एक फ्रेम, एक परिवार
नौवीं के बच्चों ने ठान लिया था कि अपने सामाजिक विज्ञान के अध्यापक, A... सर को विदाई पर कुछ खास देंगे। सर अगले महीने ट्रांसफर हो रहे हैं। पूरी क्लास ने प्लान बनाया – सर की 3 साल 8 महीने की पुरानी फोटो इकट्ठी करके एक बड़ा फोटो फ्रेम बनवाया जाए। S..... और M.... ने जिम्मेदारी ली। उन्होंने सर के पुराने छात्रों से और खुद A.... सर से फोटो मांगी और फोटो जुटाईं। 15 दिन की मेहनत से बहुत सुंदर फ्रेम बन गया। फ्रेम के बीच में लिखा था – "आप हमारे रास्ते के दीपक हैं, अ.... सर।" पर AB....
Amit Dhaka
Jun 133 min read
हम और वे...
आज मेघा बहुत खुश थी क्योंकि आज उसके स्कूल में वार्षिकोत्सव था। वह खूब चहक रही थी क्योंकि आज वह मंच पर डांस करने वाली थी। कई दिन से वह अभ्यास कर रही थी अपने फ्रैंड्स के साथ। स्कूल में, घर में, जब भी मौका मिलता वह डांस की प्रैक्टिस किया करती। आज वह अवसर था कि अपनी कला को वह मंच पर प्रस्तुत करे। आज उसकी नींद भी बड़ी जल्दी टूटी थी या यूँ कहिए कि शायद वह पिछली रात ठीक से सोई ही नहीं! कैसे रात बीती पता ही न चला! सुबह 4:00 बजे अचानक से उसका ध्यान गया- ‘मैंने सारी चीजें रख ली हैं न?

Avinash Jha
Jun 138 min read
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