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मेहनत का फल

Jun 19
2 min read

मधु नाम की एक लड़की थी। वह अपने दादाजी के साथ एक गाँव में एक छोटी-सी झोपड़ी में रहती थी। मधु को पढ़ाई का बहुत शौक था। वह अक्सर अपने घर के सामने वाले पेड़ के नीचे अपने दादाजी के साथ बैठकर पढ़ती और बातें करती थी। उसके दादाजी हमेशा उससे कहते थे कि जिसके साथ कोई नहीं होता उसके साथ एजुकेशन होती है, और यह सुनकर मधु और मेहनत करती थी।


मधु बस चाहती थी कि मेरे दादाजी ने जिन कष्टों के साथ अब तक की ज़िंदगी बिताई है वह उन्हें उससे बेहतर ज़िंदगी दे पाए। घर में वही तो उसके एकमात्र सहारा थे। वह चाहती थी कि एक बड़ा घर खरीदे और वहाँ वह उन्हें हर ज़रूरी वस्तु उपलब्ध करा पाए।


पढ़ाई करते-करते मधु आगे बढ़ती गई और इस बार उसने अपने कॉलेज का फाइनल एग्जाम दे दिया था। फिर आया मधु के रिजल्ट का दिन। मधु अपने दोस्त के घर ऑनलाइन रिजल्ट देखने गई। मधु डरते हुए अपना रोल नंबर डालती है और आँखें बंद कर लेती है। थोड़ी देर बाद मधु की दोस्त बोलती है— "अरे मधु बधाई हो, तुमने पूरे कॉलेज में टॉप किया है।"

मधु ने तुरंत अपनी आंखें खोली और रिजल्ट देखा। हर विषय में उसे ए प्लस मिला था। मधु तो खुशी के मारे कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। वह जल्दी से घर जाती है। उसके दादाजी उसका इंतजार कर रहे थे। मधु भागते हुए आती है और अपने दादाजी को बताती है कि वह अपने कॉलेज में फर्स्ट आई है। उसके दादाजी बहुत खुश हुए।


तभी मधु के दादाजी के फोन पर एक कॉल आया। दादाजी ने कॉल उठाई। मधु को नंबर 1 कंपनी के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। अगले दिन मधु इंटरव्यू देने गई और चुन ली गई। फिर कंपनी ने उसे शहर बुलाया। पहले मधु अकेले शहर गई। कुछ महीने बाद उसका प्रमोशन हो जाता गया। फिर मधु ने अपना एक घर लिया और अगले दिन काम से छुट्टी लेकर गाँव गई। अपने दादाजी को शहर ले जाते हुए वह बहुत खुश थी क्योंकि आज से मधु अपने दादाजी को ऐसी जिंदगी देगी जिसके वे हकदार हैं।

बस में बैठे-बैठे अब तक की पूरी ज़िंदगी उसकी नज़र के सामने से गुजर गई। उसका ध्यान गया कि अपनी ढलती उम्र और पैसों की परेशानियों के बावज़ूद दादाजी ने उसे कभी निराश नहीं होने दिया। उसका धैर्य और उत्साह हमेशा बनाए रखा। तभी तो आज वह यह सब हासिल कर पाई। उसे खुद में यह भरोसा भी बना कि मेहनत करने वालों को सफलता जरूर मिलती है। लगन और धैर्य से सपने पूरे होते हैं।


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