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झूठ का सहारा

माधव नाम का एक लड़का था। वह एक बड़े शहर में रहता था। माधव बहुत शरारती था 😄। उसके पापा का अपना काम(व्यवसाय) था और मम्मी घर की तथा माधव की देखभाल करती थीं। माधव दिनभर खेलता रहता था ⚽। उसके मम्मी-पापा उसकी इस आदत से बहुत चिंतित रहते थे।


​कुछ दिनों बाद माधव की परीक्षा थी, पर वह पढ़ने का नाम ही नहीं ले रहा था 📚❌। जब भी मम्मी उससे कहतीं, "बेटा पढ़ लो, थोड़े अच्छे नंबर आ जाएँगे," तब माधव कहता-“अरे मम्मी, आप चिंता मत करो, मैं पास हो जाऊँगा 😎।” और यह कहकर वह वापस टीवी देखने लग जाता था 📺।


​फिर परीक्षा का दिन आया। माधव ने जब प्रश्न-पत्र देखा, तो उसके पसीने छूट गए 😰। पेपर खत्म करने के बाद वह बहुत चिंतित था। वह घर आया और चुपचाप सो गया 😴। इसके बाद वह खेलने तो गया, लेकिन उसका मन नहीं लगा। उसे परीक्षा के परिणाम की चिंता खाए जा रही थी।


​फिर परिणाम (रिजल्ट) का दिन आया। माधव ने परिणाम आने की बात किसी को नहीं बताई और अकेले ही परिणाम-पत्र लेने चला गया। घर लौटने पर जब उसकी मम्मी ने पूछा, “परीक्षा का परिणाम अभी तक नहीं आया क्या?” तो माधव ने डरकर झूठ बोल दिया, “मम्मी, वह कल आएगा,” और अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया 🚪।


​अगले दिन माधव के लिए परिणाम-पत्र दिखाना मज़बूरी थी। आखिर कब तक छुपाता! मम्मी ने जब परिणाम-पत्र देखा तो वह चौंक गईं 😲। उन्होंने देखा कि माधव परीक्षा में फेल हो गया है। असल में माधव के 100 में से सिर्फ 10 नंबर आए थे। मम्मी ने कहा- “तुम तो पढ़ाई ही नहीं करते थे, तो इतने कम मार्क्स आना तो तय ही था।”

​घर के सभी लोग उसकी तरफ देख रहे थे। माधव को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने रोते हुए अपने पापा, मम्मी और दादी से माफ़ी मांगी 🙏।


​माधव ने मन ही मन सोचा कि अब उसे बहुत मेहनत करनी होगी 💪। उसने कसम खाई कि अब वह पूरी लगन से पढ़ेगा। अगले दिन से माधव ने मन लगाकर पढ़ाई शुरू की 📖 और धीरे-धीरे वह पढ़ाई में बहुत अच्छा बन गया। इस तरह माधव ने अपनी गलती सुधार ली। उसने खुद में एक और बदलाव देखा। उसका झूठ का सहारा लेना भी बंद हो गया था।

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