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नौवीं फेल

नौवीं कक्षा का मासूम बबलू एक नम्र निवेदन लेकर प्रिंसिपल ऑफिस में पहुँचा। 


बबलू ने कहा, “सर, मुझे स्कूल से मत निकालिए। मुझे NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) में मत डालिए। मैं तीसरी बार फेल नहीं होऊंगा।”


प्रिंसिपल सर ने कहा, “देखो बबलू, हम तुम्हें निकाल कहाँँ रहे हैं! तुम्हें नियमित विद्यालय के विषयों में पास होने में दिक्कत आ रही है। तुम्हें वह कठिन लगता है। यहाँ तो मज़बूरी है, तुम्हारा विषय बदल नहीं सकते। पर वहाँ आसान लगने वाले अन्य विषय लेकर तुम पढ़ सकते हो और तुम्हारे ‘पास’ होने की संभावना बढ़ जाएगी।”


बबलू ने बड़ी मासूमियत से कहा, “पर ऐसा तो हर जगह नहीं होता। मेरे साथ ही ऐसा क्यों, सर?”


प्रिंसिपल अकचकाए। बोले, “समझा नहीं!”


बबलू ने बड़ी विनम्रता से बात स्पष्ट करने की कोशिश की, “जब हमारे शिक्षा मंत्री कई बार…”


प्रिंसिपल साहब अपनी मुस्कुराहट दबाते हुए थोड़ी ऊँची आवाज़ में बोले, “चुप हो जा क्रांतिकारी!” …पर जल्दी ही उसे पुचकारने लगे। शायद उन्हें अचानक खयाल आया कि कहीं यह क्रांतिकारी एक प्रिंसिपल की भूमिका में उनके पास-फेल का हिसाब न करने लगे!

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