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सदा सुखी रहो!
“सदा सुखी रहो!” यह आशीर्वचन हमने खूब पाया भी और दिया भी। पर क्या अपनी और दूसरों की ज़िंदगी में सुख सुनिश्चित हुआ? संबंधों में घुटन और परिवारों में टूटन के मामले भरे पड़े हैं। सभी की शुभभावनाओं और शुभकामनाओं के बावज़ूद ऐसी स्थिति क्यों है? क्या परिवार में पैसे और संसाधनों की कमी इसका कारण है? यदि ऐसा है तो साधन संपन्न अमीर परिवारों में ऐसी स्थिति क्यों आती है? यहाँ तक कि वो परिवार जो कभी विपन्नता में मुस्कुराकर जी चुके हों, उनमें से अनेक सम्पन्नता आने के बाद बिखराव में क्यों चल

Avinash Jha
Jun 85 min read


रिस्की प्यार
क्या आपको कभी किसी पर प्यार आया है? यदि हाँ, तो आप मुझे बेहतर समझ सकेंगे। एक दिन की जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ वह ऐसे ही एक प्यार की छोटी-सी कहानी है। यह बात तब की है जब मैं ओडिशा के सुंदरगढ़ के जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ता था जो कि आवासीय यानी हॉस्टल वाला था। उस समय शायद मैं नौवीं या दसवीं कक्षा में था। शाम का वक़्त था। आसमान में सूरज लालिमा लिए ढल रहा था। मैं टहलने निकला… अकेले। हमारे हॉस्टल की बाउंड्री एक जगह टूटी हुई थी। मैं उस पार एक तालाब की ओर बढ़ रहा था। रास्ता कच

Avinash Jha
Jun 71 min read


मदद
पिछले वर्ष गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ एक मेले में गई थी। शाम का समय था। चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनियाँ जगमगा रही थीं। बच्चे झूलों का आनंद ले रहे थे और दुकानों से खाने-पीने की चीज़ों की खुशबू आ रही थी। मेले का वातावरण बहुत उत्साहपूर्ण और आनंदमय था। मैं भी अपने माता-पिता के साथ मेले का आनंद ले रही थी। तभी मेरी नज़र एक छोटी बच्ची पर पड़ी। वह एक कोने में खड़ी रो रही थी। उसके चेहरे पर डर और घबराहट साफ दिखाई दे रहा था। उसे देखकर मेरे मन में दया और चिंता का भाव उत्प

Reeta Kumari
Jun 61 min read


मछली के रिश्तेदार
मैं शायद उस समय चौथी कक्षा में पढ़ता रहा होऊंगा। जहाँ हम रहा करते थे, वहाँ से अपने गाँव जाना हुआ। मुझे याद आता है कि हमारा बाँस पर मिट्टी की लेप वाली दीवार वाला घर हुआ करता था। आँगन भी गोबर और मिट्टी से लिपा हुआ था। उस दिन घर में कुछ विशेष बन रहा था। माँ ने आँगन में एक मिट्टी के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाई हुई थी। उसमें मछलियाँ तली जा रही थीं। मछलियों के टुकड़ों को तले जाते देख अनायास ही मन में एक खयाल आया और मैंने माँ से पूछ डाला, “माँ, इन मछलियों के भी तो माता-पिता, भाई-बहन होते हों

Avinash Jha
Jun 53 min read
कुरकुरे का मजा
मैं तब छह साल की थी, जब मैं अपने गाँव उत्तराखंड घूमने गई थी। हम रात के समय गाँव पहुँचे। हम जैसे-जैसे घर के थोड़े-थोड़े पास जा रहे थे, वैसे-वैसे हमें घर के बाहर कोई खड़ा हुआ थोड़ा स्पष्ट दिखने लगा था। जब हम घर पहुँचे, तब पता चला कि वह कोई और नहीं, वह तो मेरी ताई जी थीं। फिर उन्होंने हमें तिलक लगाया और मम्मी को गले लगाया। फिर हम कमरे में कंबल ओढ़कर बैठ गए और हमने खूब बातें की। अगले दिन मुझे मेरे भैया मिले। वे हमारे लिए कुरकुरे लाए थे। हमें कुरकुरे देते ही भैया बिस्तर पर लेट गए।
Himani
Jun 52 min read


ज्ञानी जी
मैं हमेशा से समझदार रहा हूँ। देखिए, आप मेरे समझदार होने के एहसास के इस सरल अभिव्यक्ति पर हँसिए मत! मैं अपनी समझदारी का पूरा प्रमाण रखूंगा। अब यही बात लीजिए। मेरे बचपन में, परिवार और स्कूल में मुझे अनुकरण किए जाने की बात अन्य बच्चों को कही जाती थी। आखिर मैं समझदार था, तभी तो! आगे चलकर मैं शिक्षक बना। क्या यह अपने आप में समझदार होने का प्रमाण नहीं!... है न? यदि आपको अभी भी मेरे समझदार होने पर शक़ है तो आगे की एक और बात बताता हूँ। वर्ष 2016 में, दिल्ली के सरकारी शिक्षा व्यवस्था क

Avinash Jha
Jun 57 min read
ग्रैजुएट
एक दिन घर में मेरी श्रीमती जी पूजा की तैयारी में लगी हुई थीं। उन्होंने बेडरूम के फर्श को धोकर साफ किया। मेरे लिए आदेश आया- “गैस सिलेंडर इस कमरे में लाकर पूजा वाले चूल्हे में जोड़ दीजिए।” मैंने आदेश का पालन किया। कोई जिरह नहीं किया। आस्था का सवाल था। विशेष साफ सफाई और पवित्रता का ध्यान रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही थी। मैं रसोई घर में गया। वहाँ के चूल्हे से गैस सिलिंडर का पाइप अलग किया और बेडरूम के फर्श पर रखे पूजा वाले चूल्हे से उसे जोड़ दिया। श्रीमती जी ने कड़ाही चढ़ाई और पूज

Avinash Jha
Jun 12 min read


एक और कालिदास...
यह घटना तब की है जब हम उड़ीशा के कांसबहाल में रहा करते थे। पिताजी की वहाँ नौकरी थी और वहाँ हमें कंपनी का मकान मिला हुआ था। बहुत ही सुंदर कॉलोनी थी। मकान के साथ बागवानी के लिए जगह…साथ में एक बड़ा आंगन। वहाँ हरियाली भी खूब थी। रोड के दोनों ओर बड़े–बड़े छायादार पेड़ थे। उन दिनों हमारे घर में केरोसिन और लकड़ी का इस्तेमाल खाना पकाने के इंधन के रूप में होता था। वहाँ पास के गाँव के लोग जलावन की लकड़ी बेचने के लिए गट्ठर बाँधकर आया करते थे। आज भी यह बताते समय वह दृश्य जीवंत महसूस हो रहा है।

Avinash Jha
Jun 13 min read
शिक्षा और गुरु-शिष्य संबंध
आज शिक्षक दिवस है I शिक्षक दिवस, शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाता हैI यह भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी...
Suman Rawat
Sep 5, 20203 min read
मेरे शिक्षक
टीचर बनने का ख्वाब मेरा पहला ख्वाब नहीं था लेकिन मैं हमेशा से अपनी टीचर के जैसा बनना चाहती थी । उनके जैसा बनने का मतलब था, लगन का पक्का,...
TINA NEGI
Sep 5, 20201 min read
" जैसा आप मुनासिब समझे "
हैं जितना खिड़की से दिखता, बस जीती हूँ उतना सा बस उतना ही धन मेरा हैं, मन से छू लेती हूँ जितना सा। बिन मेरे मन के एक कहलाए, हैं कुछ एेसे...
Shivani Gupta
Aug 27, 20201 min read
Right to Education v/s Child Labour
Hey Education, do you know me?? Oh! How can you forget me?? I am your old & permanent foe "Child Labour", I am a prominent obstacle of...
swapnilsk1605
Aug 24, 20201 min read
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