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एक फ्रेम, एक परिवार
नौवीं के बच्चों ने ठान लिया था कि अपने सामाजिक विज्ञान के अध्यापक, A... सर को विदाई पर कुछ खास देंगे। सर अगले महीने ट्रांसफर हो रहे हैं। पूरी क्लास ने प्लान बनाया – सर की 3 साल 8 महीने की पुरानी फोटो इकट्ठी करके एक बड़ा फोटो फ्रेम बनवाया जाए। S..... और M.... ने जिम्मेदारी ली। उन्होंने सर के पुराने छात्रों से और खुद A.... सर से फोटो मांगी और फोटो जुटाईं। 15 दिन की मेहनत से बहुत सुंदर फ्रेम बन गया। फ्रेम के बीच में लिखा था – "आप हमारे रास्ते के दीपक हैं, अ.... सर।" पर AB....
Amit Dhaka
Jun 133 min read
हम और वे...
आज मेघा बहुत खुश थी क्योंकि आज उसके स्कूल में वार्षिकोत्सव था। वह खूब चहक रही थी क्योंकि आज वह मंच पर डांस करने वाली थी। कई दिन से वह अभ्यास कर रही थी अपने फ्रैंड्स के साथ। स्कूल में, घर में, जब भी मौका मिलता वह डांस की प्रैक्टिस किया करती। आज वह अवसर था कि अपनी कला को वह मंच पर प्रस्तुत करे। आज उसकी नींद भी बड़ी जल्दी टूटी थी या यूँ कहिए कि शायद वह पिछली रात ठीक से सोई ही नहीं! कैसे रात बीती पता ही न चला! सुबह 4:00 बजे अचानक से उसका ध्यान गया- ‘मैंने सारी चीजें रख ली हैं न?

Avinash Jha
Jun 138 min read
फिर ऐसा क्यों?
एक नन्ही–सी बालिका के नयनों में थे अश्रु भरे। और साथ में थे उसके न जाने कई प्रश्न खड़े। करीब पहुँचकर मैंने पूछी उससे उसकी व्यथा। नयन मेरे भी भर आए सुन उसकी करुण कथा। पूछा उसने - हे गुरुवर यह अल्ट्रासाउंड क्या होता है? मैंने भींच उसे अंकों में कहा - प्रश्न पूछने को कोई रोता है! पर कॉंपते होठों ने उसके प्रश्न वही दोहराया। आशंकित हो सिहर उठा मैं, और धीरे से बतलाया - 'यह है चमत्कार विज्ञान का, छुपी बात बताता है। क्या है शरीर के भीतर, बाहर ही यह दिखलाता है।' 'पर यह कैसा चमत्कार ह

Avinash Jha
Jun 122 min read
ठक-ठक
शायद वह रविवार का दिन था। मैं भैया के साथ उनके दोस्तों से मिलने गया। जगह का नाम तो याद नहीं आ रहा। पर वह जगह थी दिल्ली में ही! जब हम उनके कमरे के दरवाजे पर पहुँचे तो देखा वे कुछ दोस्त ज़मीन पर बैठे हुए अपने सामने रखी टीवी पर नज़रें गड़ाए हुए थे। चूँकि यह नब्बे के दशक की बात है तो उस समय के लोग जानते होंगे कि टीवी कैसा हुआ करता था…वही बक्से वाला! उस तरह के टीवी को CRT टीवी के नाम से आजकल के लोग गूगल पर सर्च करके जान सकते हैं। तो आखिर उस टीवी पर ऐसा क्या चल रहा था कि नज़रें उस प

Avinash Jha
Jun 95 min read


मेरा मासूम भाई
बचपन में मेरे भाई के साथ एक बड़ी मजेदार घटना घटी थी। मेरा भाई तब 3 साल का ही था। मेरे पापा और मामा कार्तिक को चलना सीखा रहे थे, पर वह चल ही नहीं रहा था। मैं अंदर कमरे में पढ़ रही थी। मुझे भी उसे देखना था चलते हुए। मैं कमरे से झाँकने लगी। काफी कोशिश करने के बाद पापा और मामा थक गए। उनकी हालत तो बिल्कुल टाइट हो चुकी थी! उन्हें देखकर मुझे तो इतनी हँसी आ रही थी, इतनी हँसी आ रही थी कि मत ही पूछो! फिर अचानक कार्तिक खड़ा हुआ और चलने लगा। सब तालियाँ बजा रहे थे। मैं आश्चर्य में थी और स
Himani
Jun 82 min read
सदा सुखी रहो!
“सदा सुखी रहो!” यह आशीर्वचन हमने खूब पाया भी और दिया भी। पर क्या अपनी और दूसरों की ज़िंदगी में सुख सुनिश्चित हुआ? संबंधों में घुटन और परिवारों में टूटन के मामले भरे पड़े हैं। सभी की शुभभावनाओं और शुभकामनाओं के बावज़ूद ऐसी स्थिति क्यों है? क्या परिवार में पैसे और संसाधनों की कमी इसका कारण है? यदि ऐसा है तो साधन संपन्न अमीर परिवारों में ऐसी स्थिति क्यों आती है? यहाँ तक कि वो परिवार जो कभी विपन्नता में मुस्कुराकर जी चुके हों, उनमें से अनेक सम्पन्नता आने के बाद बिखराव में क्यों चल

Avinash Jha
Jun 85 min read


रिस्की प्यार
क्या आपको कभी किसी पर प्यार आया है? यदि हाँ, तो आप मुझे बेहतर समझ सकेंगे। एक दिन की जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ वह ऐसे ही एक प्यार की छोटी-सी कहानी है। यह बात तब की है जब मैं ओडिशा के सुंदरगढ़ के जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ता था जो कि आवासीय यानी हॉस्टल वाला था। उस समय शायद मैं नौवीं या दसवीं कक्षा में था। शाम का वक़्त था। आसमान में सूरज लालिमा लिए ढल रहा था। मैं टहलने निकला… अकेले। हमारे हॉस्टल की बाउंड्री एक जगह टूटी हुई थी। मैं उस पार एक तालाब की ओर बढ़ रहा था। रास्ता कच

Avinash Jha
Jun 71 min read


मदद
पिछले वर्ष गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ एक मेले में गई थी। शाम का समय था। चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनियाँ जगमगा रही थीं। बच्चे झूलों का आनंद ले रहे थे और दुकानों से खाने-पीने की चीज़ों की खुशबू आ रही थी। मेले का वातावरण बहुत उत्साहपूर्ण और आनंदमय था। मैं भी अपने माता-पिता के साथ मेले का आनंद ले रही थी। तभी मेरी नज़र एक छोटी बच्ची पर पड़ी। वह एक कोने में खड़ी रो रही थी। उसके चेहरे पर डर और घबराहट साफ दिखाई दे रहा था। उसे देखकर मेरे मन में दया और चिंता का भाव उत्प

Reeta Kumari
Jun 61 min read


मछली के रिश्तेदार
मैं शायद उस समय चौथी कक्षा में पढ़ता रहा होऊंगा। जहाँ हम रहा करते थे, वहाँ से अपने गाँव जाना हुआ। मुझे याद आता है कि हमारा बाँस पर मिट्टी की लेप वाली दीवार वाला घर हुआ करता था। आँगन भी गोबर और मिट्टी से लिपा हुआ था। उस दिन घर में कुछ विशेष बन रहा था। माँ ने आँगन में एक मिट्टी के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाई हुई थी। उसमें मछलियाँ तली जा रही थीं। मछलियों के टुकड़ों को तले जाते देख अनायास ही मन में एक खयाल आया और मैंने माँ से पूछ डाला, “माँ, इन मछलियों के भी तो माता-पिता, भाई-बहन होते हों

Avinash Jha
Jun 53 min read
कुरकुरे का मजा
मैं तब छह साल की थी, जब मैं अपने गाँव उत्तराखंड घूमने गई थी। हम रात के समय गाँव पहुँचे। हम जैसे-जैसे घर के थोड़े-थोड़े पास जा रहे थे, वैसे-वैसे हमें घर के बाहर कोई खड़ा हुआ थोड़ा स्पष्ट दिखने लगा था। जब हम घर पहुँचे, तब पता चला कि वह कोई और नहीं, वह तो मेरी ताई जी थीं। फिर उन्होंने हमें तिलक लगाया और मम्मी को गले लगाया। फिर हम कमरे में कंबल ओढ़कर बैठ गए और हमने खूब बातें की। अगले दिन मुझे मेरे भैया मिले। वे हमारे लिए कुरकुरे लाए थे। हमें कुरकुरे देते ही भैया बिस्तर पर लेट गए।
Himani
Jun 52 min read


ज्ञानी जी
मैं हमेशा से समझदार रहा हूँ। देखिए, आप मेरे समझदार होने के एहसास के इस सरल अभिव्यक्ति पर हँसिए मत! मैं अपनी समझदारी का पूरा प्रमाण रखूंगा। अब यही बात लीजिए। मेरे बचपन में, परिवार और स्कूल में मुझे अनुकरण किए जाने की बात अन्य बच्चों को कही जाती थी। आखिर मैं समझदार था, तभी तो! आगे चलकर मैं शिक्षक बना। क्या यह अपने आप में समझदार होने का प्रमाण नहीं!... है न? यदि आपको अभी भी मेरे समझदार होने पर शक़ है तो आगे की एक और बात बताता हूँ। वर्ष 2016 में, दिल्ली के सरकारी शिक्षा व्यवस्था क

Avinash Jha
Jun 57 min read
ग्रैजुएट
एक दिन घर में मेरी श्रीमती जी पूजा की तैयारी में लगी हुई थीं। उन्होंने बेडरूम के फर्श को धोकर साफ किया। मेरे लिए आदेश आया- “गैस सिलेंडर इस कमरे में लाकर पूजा वाले चूल्हे में जोड़ दीजिए।” मैंने आदेश का पालन किया। कोई जिरह नहीं किया। आस्था का सवाल था। विशेष साफ सफाई और पवित्रता का ध्यान रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही थी। मैं रसोई घर में गया। वहाँ के चूल्हे से गैस सिलिंडर का पाइप अलग किया और बेडरूम के फर्श पर रखे पूजा वाले चूल्हे से उसे जोड़ दिया। श्रीमती जी ने कड़ाही चढ़ाई और पूज

Avinash Jha
Jun 12 min read
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