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मेरे शिक्षक

टीचर बनने का ख्वाब मेरा पहला ख्वाब नहीं था लेकिन मैं हमेशा से अपनी टीचर के जैसा बनना चाहती थी । उनके जैसा बनने का मतलब था, लगन का पक्का, मेहनती, चुस्त और हमेशा जागरूक रहने वाला शख्स बनना। उनकी तरह बच्चों के हजारों सवालों को सुनना, हर बार पाठ को नई तरह से समझाना, अपने गुस्से और झल्लाहट को प्यार भरी मुस्कान में बदलना, बिना बताए ही अपने विद्यार्थियों की परेशानियों को भाप लेना, जीवन की हर अच्छी बुरी घड़ी में तालमेल बैठाना और हर बच्चे के दिल में चुपके से अपनी जगह बना लेना।

मेरे अध्यापकों ने मुझे सिर्फ पढ़ाया नहीं है बल्कि मुझे पढ़ा भी है । मेरी क्षमताओं से मुझे रूबरू कराया है तो मेरी कमियों का चेहरा भी दिखाया है ।

कभी उनकी डाँट और सलाह गलत राह से खींच कर लाई है , तो कभी शाबाशी ने पीठ थपथपाई है । स्कूली जीवन का हर एक लम्हा उन टीचर्स के इर्द -गिर्द ही रहा है जो हमेशा हमारे विषय में सोंचते, हमें सिखाते और आने वाले जीवन के लिए तैयार करने में जुटे रहते थे ।


मुझे बनाने और सँवारने के लिए मेरे उन गुरूओं को मेरा शत् शत् प्रणाम ।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ।


टीना



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