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झूठ का सहारा
माधव नाम का एक लड़का था। वह एक बड़े शहर में रहता था। माधव बहुत शरारती था 😄। उसके पापा का अपना काम(व्यवसाय) था और मम्मी घर की तथा माधव की देखभाल करती थीं। माधव दिनभर खेलता रहता था ⚽। उसके मम्मी-पापा उसकी इस आदत से बहुत चिंतित रहते थे। कुछ दिनों बाद माधव की परीक्षा थी, पर वह पढ़ने का नाम ही नहीं ले रहा था 📚❌। जब भी मम्मी उससे कहतीं, "बेटा पढ़ लो, थोड़े अच्छे नंबर आ जाएँगे," तब माधव कहता-“अरे मम्मी, आप चिंता मत करो, मैं पास हो जाऊँगा 😎।” और यह कहकर वह वापस टीवी देखने लग जाता
Himani
Jun 242 min read
लाड़-प्यार की कीमत
यह कहानी हमारे ही मोहल्ले की है, जहाँ एक परिवार रहता है। लॉकडाउन से पहले वे लोग बहुत खुश थे और हँसी-खुशी अपनी ज़िंदगी जी रहे थे। उनके घर में एक छह साल का छोटा बच्चा था, जो पूरे घर की जान था। जब लॉकडाउन लगा, तो सब कुछ बंद हो गया। उस समय वह बच्चा घर में बैठे-बैठे बहुत ज़्यादा मैदे से बनी चाऊमीन और मोमोज़ खाने लगा। हर रोज़ उसकी यही ज़िद रहती थी और घर वाले भी लाड़-प्यार में उसे खिला देते थे। लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह बाहर का खाना अंदर ही अंदर उसे कितना नुकसान पहुँचा रह

Yogita
Jun 242 min read


हे वटवृक्ष!
उस दिन वट सावित्री की पूजा का दिन था। आवश्यकतावश घर में यह प्रश्न उठा कि क्या आसपास में कोई बरगद का पेड़ है। यह तो आपको पता ही होगा कि यह व्रत हिन्दू विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की सुखद लंबी आयु के लिए करती हैं। इस व्रत में वे बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते हुए कलावा/धागा उसके तने पर लपेटती हैं। तो, हम जहाँ रह रहे थे, मुझे उस समय उसके आस-पास में बरगद के पेड़ की कोई जानकारी नहीं थी। पर एक दिन साथ में घर लौटते वक़्त श्रीमतीजी को रास्ते में एक जगह बरगद का पेड़ दिखा था। उन्होंने तभी

Avinash Jha
Jun 233 min read
Books: A Quiet Sanctuary for the Heart
Google the word "books" and you will get results that say, "Books are fundamental tools for human growth, acting as gateways to knowledge." Google "reading" and you will learn that it reduces stress, sharpens memory, expands vocabulary, and more. While these reasons are lucrative enough to motivate someone to read books, trust me, these benefits are just the tip of the iceberg. Reading does all this and much more; it is one of the ultimate keys to your brain health and mental

Preeti Hans
Jun 203 min read
मेहनत का फल
मधु नाम की एक लड़की थी। वह अपने दादाजी के साथ एक गाँव में एक छोटी-सी झोपड़ी में रहती थी। मधु को पढ़ाई का बहुत शौक था। वह अक्सर अपने घर के सामने वाले पेड़ के नीचे अपने दादाजी के साथ बैठकर पढ़ती और बातें करती थी। उसके दादाजी हमेशा उससे कहते थे कि जिसके साथ कोई नहीं होता उसके साथ एजुकेशन होती है, और यह सुनकर मधु और मेहनत करती थी। मधु बस चाहती थी कि मेरे दादाजी ने जिन कष्टों के साथ अब तक की ज़िंदगी बिताई है वह उन्हें उससे बेहतर ज़िंदगी दे पाए। घर में वही तो उसके एकमात्र सहारा थे।
Himani
Jun 192 min read


Untold Maggi Mania
Maggi has been crafted for every household name. One of the longest journeys by Nestle to change the foodie behaviour of Indian Masses as Instant Noddles in 2 minute strategy. Healthy or unhealthy, restrictions to pregnant lady and to infant due to MSG, it is not an issue. But acceptance by the masses especially the younger generation of every decade is a special untold story. Two minute strategy was a marketing gimmicks. Adding vegetables or egg or anything else as per the

Ranjeet Jaiswal
Jun 183 min read
बहु चाहिए या बाई?
हमारे मोती नगर में दो परिवार रहते हैं—एक शर्मा जी का और दूसरा वर्मा जी का। इत्तफाक देखो कि आने वाले कुछ महीनों में दोनों ही घरों में शादियाँ थीं क्योंकि दोनों के बेटों का रिश्ता पक्का हो चुका था। लेकिन भाई, दोनों परिवारों की सोच में जमीन-आसमान का अंतर था। शर्मा जी का बेटा है अमन, जो कि एक बिजनेसमैन है। शर्मा जी के घर वालों की पुरानी सोच थी कि बहू ऐसी आए जो चौका-बर्तन और घर का सारा काम संभाल ले, ताकि सास-ससुर को आराम मिले। अमन की तो अरेंज्ड मैरिज थी, तो जैसा घर वालों ने कहा, उ

Yogita
Jun 183 min read


शाकाहारी माँस
क्या आपने शाकाहारी माँस खाया है? नहीं-नहीं, शाकाहारी का माँस नहीं, शाकाहारी माँस! नहीं समझे? यदि समझ गए तो बहुत बढ़िया, और न समझे तो आगे समझ आ ही जाएगा! चिंता की कोई बात ही नहीं! क्यों, इतनी-सी बात यदि ज़िंदगी के हर मामले में आ जाए, तो कैसी सहजता हो, कैसा आराम हो! कुछ पहले से आता हो तो बहुत बढ़िया, न आता हो तो जानने-सीखने का अवसर बना है, जान लेंगे, सीख लेंगे। आपको बताता हूँ कि क्या है यह शाकाहारी माँस और कैसे आया यह मेरी ज़िंदगी में! पर उसे बताने से पहले आपसे वह एक बात साझा क

Avinash Jha
Jun 185 min read
पी-पी वाला बाजा
यह कहानी मेरी और मेरी छोटी बहन की है, जब हम दोनों बहुत छोटे थे। उस वक्त मेरी उम्र करीब 6 साल थी और मेरी बहन सिर्फ 2 साल की थी। मेरी बहन को बचपन से ही अंधेरे से बहुत ज़्यादा डर लगता था, लेकिन बचपन की नादानी में हम इस डर की गहराई को नहीं समझते थे। एक दिन दोपहर के समय हम दोनों घर में छुपन-छुपाई खेल रहे थे। सबसे पहले छुपने की बारी मेरी थी। हमारे घर में लकड़ी की छोटी-छोटी कई अलमारियां थीं, मैं फुर्ती से उनमें से एक के अंदर छुप गई। मेरी बहन ने अपनी नन्हीं आँखों से मुझे थोड़ी ही देर

Yogita
Jun 173 min read
लड़के-लड़की का भेदभाव
लड़के-लड़की का भेदभाव हमारे समाज में लंबे समय से चला आ रहा है। बचपन से ही लड़की को सिखाया जाता है कि "उनकी बेटी से कुछ सीख, वो कितनी शांत है", पर लड़के को कभी नहीं बोला जाता कि "थोड़ा झुक कर बात कर लो"। लड़की को अपने लिए बड़ों से कुछ कहना हो तो बात ज़ुबान तक ही रह जाती है, क्योंकि घर में ही यह बता दिया जाता है कि बड़े बोल रहे हैं तो बस सुनो, सवाल मत करो। उसे यह भी समझा दिया जाता है कि लड़की का चुप रहना अच्छा लगता है, और अगर वो अपने हक के लिए बोली या लड़ गई, तो लोग तुरंत कह दे

Manika Negi
Jun 152 min read
बातें
मैं बातें खूब करता हूँ और बहुत अच्छी करता हूँ। शिक्षक हो जाने में मेरे इस गुण की सार्थकता दिखती है। चलिए मेरी अनेक बातों में से आपको एक बात बताता हूँ। मुझे अपने नए स्कूल में आए हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे। उन कुछ दिनों में मेरे प्राचार्य महोदय को यह पता चल गया था कि यह बोलता अच्छा है और मंच पर जाने में इसे हिचक भी नहीं। उन्होंने इसी भरोसे पर एक दिन मेरे सुबह स्कूल पहुँचते ही एक ज़िम्मेदारी सौंपी। विभाग की ओर से एक आदेश आया था कि हाथ की सफाई के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक क

Avinash Jha
Jun 133 min read
मिठाई वाला भूत
यह घटना तब की है जब मैं 5 साल की थी। उस समय मैं और मेरे दादा-दादी एक साथ दूसरे घर में सोने जाते थे। जिस रास्ते से हम जाते थे उस रास्ते में एक पेड़ पड़ता था। लोगों का कहना था कि उस पेड़ पर एक चुड़ैल रहती थी। जो भी वहाँ से कुछ भी मीठा लेकर जाता था वह उसके पीछे पड़ जाती थी। यह बात 28 नवंबर की रात की है। उस रात हमारे घर में कुछ कार्यक्रम हुआ था जिसकी वजह से हमें उस दूसरे घर जाने में देर हो गई। इसलिए हम अपना खाने का सामान पैक करके उस घर की ओर चल पड़े। हमारे पास रसगुल्ले भी थे। उस

Yogita
Jun 132 min read
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