top of page

लड़के-लड़की का भेदभाव

Jun 15
2 min read

लड़के-लड़की का भेदभाव हमारे समाज में लंबे समय से चला आ रहा है। बचपन से ही लड़की को सिखाया जाता है कि "उनकी बेटी से कुछ सीख, वो कितनी शांत है", पर लड़के को कभी नहीं बोला जाता कि "थोड़ा झुक कर बात कर लो"। लड़की को अपने लिए बड़ों से कुछ कहना हो तो बात ज़ुबान तक ही रह जाती है, क्योंकि घर में ही यह बता दिया जाता है कि बड़े बोल रहे हैं तो बस सुनो, सवाल मत करो। उसे यह भी समझा दिया जाता है कि लड़की का चुप रहना अच्छा लगता है, और अगर वो अपने हक के लिए बोली या लड़ गई, तो लोग तुरंत कह देते हैं कि "बिगड़ गई है"।


​सबसे अजीब बात यह है कि अगर किसी ने उसके साथ कुछ बुरा बोला या बेइज्जती की, तो चुप रहना "संस्कार" है, और अगर उसी बात का जवाब दे दिया तो "तमीज नहीं है" कह कर लड़की पर उंगली उठाई जाती है।

​इसके ऊपर एक और बंदिश लगा दी जाती है। लड़कियों को बचपन से ही कह दिया जाता है कि-

  • ​8:00 बजे से पहले घर आ जाना।

  • ​घर से अकेले मत जाना।

  • ​ध्यान से रहना।

​पर यह सारे नियम सिर्फ लड़कियों के लिए हैं। लड़कों से कोई नहीं पूछता कि तुम कहाँ थे या कितने बजे आओगे। डर की वजह से लड़की की दुनिया घर की दीवारों तक सिमट जाती है, और लड़कों को पूरी आज़ादी मिल जाती है। इसी सोच की वजह से लड़की धीरे-धीरे अपनी आवाज़ दबा देती है। वो लड़ना सीख ही नहीं पाती, क्योंकि उसे बचपन से यह सिखाया गया है कि लड़ना लड़कों का काम है।


जब तक हम यह नहीं बदलेंगे कि लड़की का बोलना बदतमीज़ी नहीं, लड़के का चुप रहना कमज़ोरी नहीं, और सुरक्षा के नियम सिर्फ एक जेंडर के लिए नहीं होते, तब तक यह भेदभाव खत्म नहीं होगा।

Recent Posts

See All
Maybe We'll Talk, Aaram Se

How many times have you thought of calling someone and then told yourself, “Not now. I’m busy. We’ll talk later, aaram se.” How many times you wanted to ask someone, “How are you feeling now?” but tol

 
 
 
The Misery Olympics

Have you ever felt that people around us—or perhaps even we ourselves—are always in a race to prove that our lives are more difficult than someone else’s? The moment you tell someone, “You know, I hav

 
 
 
ज़िम्मेदारी किसकी: एक पत्र अभिभावकों के नाम

वर्तमान और भविष्य के अभिभावक साथियों, नमस्कार! अब तक की जानकारी के अनुसार इस वर्ष NEET के 14 या उससे अधिक परीक्षार्थियों ने आत्महत्या की है। इन आत्महत्याओं का ज़िम्मेदार कौन है? एक आंदोलन चल रहा है न्

 
 
 

1 Comment

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
Rated 5 out of 5 stars.

Wow great you know what aap sahi ho har ek ladki Independent ho sakti hai har ladki ko Azadi milni chahie you know what i just love it just love it

Like
bottom of page