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हां शहर ही है, गांव तो नहीं

जब भी मैं किसी के द्वारा किए गए, उसके गांव के चित्रण को पढ़ती हूं जिसमें गांव में बीते पलों का लुभावना वर्णन हो, तो लगता है कि मैंने भी कभी गांव में क्यों नहीं ऐसा समय बिताया? क्यों कभी पेड़ों की डाल पर झूले नहीं झूले, क्यों बहती नदिया में डुबकी लगाने का मज़ा नहीं लिया?

हां मेरा कोई गांव नहीं! किसी गांव में वो यादगार पल भी नहीं बिताए। कोई किस्सा कोई कहानी नहीं कि मैं आपको आपके गांव की याद दिला दूं।

में तो दिल्ली शहर में ही पैदा हुई, पली,बढ़ी, पढ़ी और छोटी छोटी खुशी के पलों को संजोया।

मुझे आज भी याद है अपना स्कूल को जाना ! टांगें में जाया करती थी। पीछे बैठे, तो चलते टांगें से उतर जाना और कुछ कदम साथ साथ चलकर फिर टांगें पर चढ़ जाना। आगे बैठे तो भैया जी से चाबुक ले लेना और फिर चाबुक हिला हिला कर ऐसे दिखना कि जैसे तांगा तो मैं ही चला रही हूं।

दिन में नंगे पांव ही घर से बाहर निकाल आना और उस आइक्रीम वाले से दस दस पैसे की orange bar लेकर खाना। पापा को दूर से आता देख डर के मारे orange bar वहीं फेंक, घर में घुस जाना। पापा को हमेशा से नंगे पांव रहने पर चिढ़ जो थी।

रात देर तक मोहल्ले की तंग गलियों में सहेलियों के साथ खेलते रहना। किसी की परवाह, डर नहीं था। किसी ने कभी रोका टोका भी नहीं। आप कहेंगे," भाई वो ज़माना ही और था।"

याद हैं ! वो सारे त्योहार, कैसे मिलकर मनाया करते थे। दीवाली के पटाखे तो पता ही न थे कि तेरे थे या मेरे। होली के रंगों से कभी प्यार न था। मुझे याद है कि मेरे पापा का इतना दबदबा था कि घर से यदि सफेद कमीज़ पहनकर सुबह निकले तो किसी की क्या मजाल कि छींट भर भी रंग डाल दें।

करवा चौथ पर तो पूरा परिवार मां और दादी के साथ ही उठ जाया करता था। सर्गी खाने। सुबह सुबह जैसे मेला लग जाता हो। दादी के हाथ के गरमा गरम गोभी के परांठे के साथ ताज़ा सफेद मक्खन। क्या बात है।

हां शहर ही था यह, गांव तो नहीं।

ऐसा नहीं कि पुरानी यादें ताज़ा कर रही हूं क्योंकि उन पलों को मिस करती हूं। मै तो आज भी हर पल को ऐसे ही खुशी से जीती हूं फिर चाहे घर में बच्चों के साथ कोई खेल खेलना हो या कोई चर्चा,रसोईघर में परांठे सेंकना हो या छत पर गमले में पौधा लगाना।

हां शहर ही है,गांव तो नहीं।

मेरी बातों सर बहुत से लोग जो सदा शहर में ही रहें हैं जुड़ाव महसूस करेंगे। दोस्तों खुशी कोई गांव और शहर में रहने की नहीं है। वह तो आपकी अपनी स्थिति है।

हर समय को ऐसे ही जियो कि पुराने पलों को याद करने की जरूरत न हो।और याद भी करें तो मन में खुशी हो टीस नहीं, पछतावा नहीं।

 
 
 

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