कुछ तो कहो
- Avinash Jha

- Jul 19
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कुछ तो कहो;
हाँ, सलीके से कहो;
कि कहोगे तो बात चलेगी।
चलेगी, तभी तो बात बनेगी!
यूँ चुप न रहो;
क्योंकि चुप्पी…
कब घुटन बन जाती है
पता ही नहीं चलता।
असहज हो, तो कहो।
दर्द में हो, तो कहो।
कहोगे नहीं…
तो भला बात कैसे बनेगी!



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