top of page

मेरी प्रेरणा - व्यापक

Jul 21, 2020
2 min read

दो परिचय शिविरों के बाद व्यापक और सहअसतित्व कुछ कुछ समझ आने लगा था। इकाइयाँ, व्यापक में डूबी,भीगी और घिरी हैं। यह बात सहज रूप से स्वीकृत हो गई।

व्यापक को देखें तो वह नित्य, सत्य,शुद्ध, बुध, व्यापक, सत्ता है। वह पारगमी है,पारदर्शी है। सत्तामयता ही परमात्मा, ईश्वर, लोकेश, चेतना शून्य ,निरपेक्ष ऊर्जा, पूर्ण है।


एक बार जब योगश भैया ने व्यापक के सदा सदा एक समान उप्लब्ध होने की बात कही तो यह बात मुझे गहरे तक छू गई और मेरा ध्यान बार बार इस ओर जाने लगा और मुझमें सभी के लिए उप्लब्ध होने की स्वीकृति बनने लगी।


दूसरी जिस बात पर मेरा ध्यान गया वो है पारगम्यता और पारदर्शिता।इन दोनों के बिना मेरा जीवन संभव ही नहीं है। न ही मैं कुछ देख सकती हूँ न ही कुछ सुन सकती हूँ न ही पहचान सकती हूँ। मैं भी पारदर्शी होना चाहती हूँ पारगम्य होना चाहती हूँ। कोशिश कर रही हूँ परंतु ऐसा लगता है अभी पहला ही कदम उठा है।

तीसरी जिस बात पर मेरा ध्यान गया वो है व्यापक का शुद्ध होना यानि एक सा सुखप्रद होना। कोशिश कर रही हूं कि सभी स्थितियों में सबके साथ एक समान रह पाऊँ, परंतु इस गलतफहमी में नहीं हूँ कि मेरी यह यात्रा बहुत आगे बढ़ गई है। सभी साथियों के सम्मुख स्वीकारना चाहती हूँ कि मैं अभी स्वयं को उस बच्चे के समान महसूस करती हूँ जिसकी आँखें अभी अभी खुली हैं और उसे कुछ चीजें साफ़ साफ़ दिखने लगी हैं। मैं उनकी ओर बढ़ना चाह रही हूँ इसलिए हाथ पैर मार रही हूँ।


सुख,समृद्धि तथा अभयपूर्वक जीने के लिए सहअस्तित्व पूर्वक जीना बनता है, और इसके लिए व्यापक को समझना और उसके अनुरूप जीना ही एकमात्र उपाय है।



 
 
 

Recent Posts

See All
घर

पूरे जीवनकाल में, हम बहुत से घरों में रहते हैं, और कुछ घर... हममें भी रहते हैं। वो घर जो हमें छत देता है, काफी समय लगता है, इस घर को बनाने में, फिर चलाने, सजाने और सँवारने में, ज़रूरी है इस घर का ध्या

 
 
 
Maybe We'll Talk, Aaram Se

How many times have you thought of calling someone and then told yourself, “Not now. I’m busy. We’ll talk later, aaram se.” How many times you wanted to ask someone, “How are you feeling now?” but tol

 
 
 
The Misery Olympics

Have you ever felt that people around us—or perhaps even we ourselves—are always in a race to prove that our lives are more difficult than someone else’s? The moment you tell someone, “You know, I hav

 
 
 

2 Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating

ईश्वर में कण-कण, कण-कण में ईश्वर।


Like

Avinash Jha
Avinash Jha
Jul 21, 2020

बढ़िया! दीदी, यदि आप व्यापक के बारे में विस्तार से बताएँ तो हमारी और स्पष्टता बने!

Like
bottom of page