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भाई बहन संबंध




अस्तित्व में संबंधों की बात करें तो व्यवस्था में मानव-मानव के बीच निम्नलिखित सात प्रकार के संबंध होते हैं।

  1. माता पिता/ पुत्र-पुत्री

  2. भाई-बहन

  3. गुरु शिष्य

  4. साथी सहयोगी

  5. मित्र मित्र

  6. पति पत्नी

  7. व्यवस्था संबंध


सभी संबंध व्यवस्था के अर्थ में ही है। संबंध का अर्थ ही है पूर्णता की ओर अनुबंध।

आज मैं आपके सम्मुख भाई-बहन संबंध पर कुछ विचार रखना चाहती हूं। इस संबंध हम देखे तो सहोदर मानव भाई भाई,भाई बहन,बहन बहन रूप में होते हैं। उसमें आपस में एक दूसरे का सहयोग करना एक वांछित क्रिया के रूप में तथा सौहाद्रको भाई बहन संबंध में निहित मूल्य के रूप में पहचान पाते हैं सौहाद्र का अर्थ है स्पष्टता से मूल्यांकन क्रियाकलाप में स्पष्टता तथा सार्थकता है।


भाई बहन संबंध में दो मुख्य बातें उभर कर आती हैं कर्तव्य और दायित्व का निर्वहन। भाई बहन संबंध में जब भी कोई एक किसी लक्ष्य की पहचान करता है तो सबसे पहले अपने भाई या बहन को ही बताता है। इसी तरह अगर देखें तो भाई-बहन में से जो भी गलती करता है वह गलती उसके भाई या बहन को सबसे जल्दी पकड़ में आती है क्योंकि वह एक दूसरे का स्पष्टता से मूल्यांकन करते हैं।


मैंने अपने जीवन में पाया है कि जब भी मेरी बहन का विकास होता है तो जितनी खुशी उन्हें होती है उतनी ही और कभी-कभी तो उनसे ज्यादा खुशी मुझे होती है। हम अपने परिवार और समाज में भी देख पाते हैं कि भाई- बहन संबंध में निहित मूल्यों की पहचान और निर्वाह होने पर वे एक दूसरे की उन्नति को स्वयं से जोड़कर देखते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे उनके भाई या बहन की अगर उन्नति नहीं उनकी स्वयं की उन्नति हो रही है और इस कारण भाई-बहन एक दूसरे के उन्नति से आनंदित रहते हैं।इसी तरह यदि भाई-बहन में से किसी एक का ह्रास रहा हो तो भी भाई बहन को सबसे जल्दी पता चलता है, क्योंकि वे सटीक मूल्यांकन प्रस्तुत करते हैं।


भाई-बहन संबंध में अगर मूल्यांकन करें तो यह देख पाते हैं कि सही दिशा में कार्य व्यवहार करने पर मेरी बहन का या भाई का समर्थन हमेशा मेरे साथ होता है। ह्रास की ओर जाने की स्थिति में उनसे मार्गदर्शन और सही दिशा में बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। कर्तव्य और दायित्व का सही से पहचान करके निर्वाह करना ही भाई-बहन संबंध की सार्थकता है। यदि दायित्व को गहराई से देखें तो हम पाते हैं कि भाई बहन संबंध में निहित मूल्यों विश्वास , सम्मान और स्नेह का निर्वाह होता है।


विश्वास मूल्य के निर्वहन के लिए आचरण की निश्चितता आवश्यक है और यदि भाई-बहन के आचरण में निश्चितता होती है तो उनको परस्पर एक दूसरे पर विश्वास होता है। यहां पर हम सम्मान को देखें तो



स्व मूल्यांकन (स्वयं का सटीक मूल्यांकन) करने से स्वयं में सम्मानित महसूस कर पाते हैं। संबंध जितना निकट का होता है उतना ही पारदर्शी होता है। (दूसरे का मूल्यांकन जैसा वह है वैसा ही उसको जान पाना) और जान कर उसके साथ सम्मान पूर्वक जीवन जीना बनता है।भाई बहन संबंधों में अरहस्यता भी देखने को मिलती है भाई और बहन एक दूसरे से संबंधों में पारदर्शिता के साथ काफी हद तक जीते हैं।


जिसके साथ ज्यादा समय व्यतीत करते हैं उसके द्वारा हमारा मूल्यांकन बहुत सही और पारदर्शी होता है। और हम स्वयं का मूल्यांकन करने के लिए परस्परता ढूंढते हैं और भाई बहन से या मित्र से अधिक परस्परता कहीं और देखने को नहीं मिलती। एक आयु वर्ग के अनुसार देखा जाए तो तो यहां सटीक मूल्यांकन देखने को मिलता है।

एक अन्य मूल्य भाई-बहन संबंध में हमें महसूस होता है वह है स्नेह। जिसका अर्थ है सुख की निरंतरता। देखने को भी मिलता है कि परेशानी में भाई बहन ही सबसे पहले यह जान पाते हैं कि उनके भाई-बहन सुखी हैं या दुखी हैं।यदि परस्परता में भाई-बहन (या भाई-भाई, या बहन-बहन) का संबंध विश्वास, सम्मान और स्नेह का होता है तो दोनों ही पक्ष विश्वास, सम्मान पूर्वक जीते हुए सुख की निरंतरता महसूस करते हैं।अभिव्यक्ति भी भाई बहन के सामने आसानी से होती रहती है।


यदि भाई बहन संबंध में मूल्यों की पहचान और निर्वहन ठीक प्रकार से नहीं होता तब ऐसी भी स्थितियां देखने को मिल ही जाती हैं जहां एक ही माता पिता की संतान का विश्वास,सम्मान और स्नेहपूर्वक जीने वाला संबंध शत्रुता में बदल जाता है। एक भाई को दूसरे भाई का शत्रु बनने कि घटनाऐं भी हमें समाज में देखने को मिल ही जाती हैं।




"आप सभी को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ"



 
 
 

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