परमाणु और व्यापक
सह अस्तित्ववाद में यह कहा गया है कि प्रत्येक इकाई व्यापक में डूबी भीगी और घिरी हुई है। व्यापक इकाइयों की ऊर्जा का मूल स्रोत है। अर्थात प्रत्येक इकाई व्यापक में भीगी होने से उर्जित,डूबी होने से क्रियाशील और घिरी होने से नियंत्रित है। मूलत: जड़ और चैतन्य इकाइयां परमाणु से बनी हैं। जब मैंने इस पर काफी गहराई से अध्ययन किया तो यह देखने को मिला कि परमाणु में 4 प्राकृतिक बल(Electromagnetic Force, Gravitational force,Strong Nucleus force and weak nuclear force) है। जिसके कारण संपूर्ण जड़ इकाई का निर्माण होता है।
वैज्ञानिकों ने परमाणु में पांचवें बल की भी कल्पना की है किंतु विज्ञान में अब तक इसका प्रमाण नहीं मिला। मध्यस्थ दर्शन में इस बल को मध्यस्थ बल के रूप में पहचाना गया। जब मैंने परमाणु की संरचना का अध्ययन किया तो पाया कि परमाणु के अंदर भी व्यापक है। यदि हम और अधिक गहराई में जाएं और परमाणु के नाभिक में देखें तो, उसमें स्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन आगे जिन कणों से मिलकर बने हुए हैं उनके बीच में भी व्यापक मौजूद है।
मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि परमाणु के अंदर सभी बल का प्रगटन निरपेक्ष ऊर्जा से ही हुआ है। कहने का तात्पर्य यह है कि व्यापक स्वरूप निरपेक्ष ऊर्जा एक परमाणु के अंदर 4 या पांच बलों के रूप में प्रकट होती है। इन्हीं बलों के आधार पर सारी जड़ प्रकृति बनी हुई है। इसका यह निष्कर्ष निकलता है कि निरपेक्ष ऊर्जा का प्रगटन पृथ्वी के प्रत्येक परमाणु में व्याप्त सब एटॉमिक पार्टीकल में होता है न कि सम्पूर्ण पृथ्वी के रूप में। इससे यह समझ आया कि मूलत: परमाणु के सबअटॉमिक पार्टिकल ही व्यापक से उर्जित होते हैं न कि संपूर्ण पदार्थ।





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