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navchetna aur navjeevan

madhyast darshan taught me lots of important aspects of life,

gave me insight to introspect myself, it is a way to think over internal

beauty. it is far away from materialistic life and gives beauty to life.

the hidden beauty which is long lasting.

 
 
 

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गधा

अपने 11 वर्ष की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते न जाने कई बार उसने लोगों के मुँह से अपने लिए ‘गधा’ संबोधन सुना होगा। ‘ओए गधे! सुनता नहीं है।’ ‘गधे! तुमसे नहीं होगा।’ ‘गधा कहीं का! तुझे इतनी सी बात समझ नहीं

 
 
 
कुछ तो कहो

कुछ तो कहो; हाँ, सलीके से कहो; कि कहोगे तो बात चलेगी। चलेगी, तभी तो बात बनेगी! यूँ चुप न रहो; क्योंकि चुप्पी… कब घुटन बन जाती है पता ही नहीं चलता। असहज हो, तो कहो। दर्द में हो, तो कहो। कहोगे नहीं… तो

 
 
 
नौवीं फेल

नौवीं कक्षा का मासूम बबलू एक नम्र निवेदन लेकर प्रिंसिपल ऑफिस में पहुँचा। बबलू ने कहा, “सर, मुझे स्कूल से मत निकालिए। मुझे NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) में मत डालिए। मैं तीसरी बार फेल नहीं

 
 
 

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